Monday, September 21, 2009

मीडिया से नाराज हैं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने पोखरण-2 के परीक्षण पर उठे बवाल को मीडिया जगत की देन करार देते हुए रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व वैज्ञानिक के संथानम के दावों को चौंकाने वाला बताया है। नारायणन ने कहा, हमारे पास थर्मोन्युक्लियर क्षमताएं हैं। अगर आप उनमें से किसी एक से किसी शहर पर हमला करेंगे, तो उनसे करीब 50 हजार से एक लाख मौतें हो सकती हैं। विभिन्न लोगों की ओर से मीडिया में स्वार्थपूर्ण प्रचार चलाया जा रहा है, जो सरकार के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि भारत के पास थर्मोन्यूक्लियर क्षमता है और आला वैज्ञानिक इसकी पुष्टि कर चुके हैं। देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों से मिलकर बना परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) पिछले हफ्ते 1998 के परमाणु परीक्षण की क्षमता पर प्रामाणिक बयान दे चुका है। अब इस मुद्दे पर सरकार की ओर से किसी अन्य स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है। एक निजी चैनल पर साक्षात्कार के दौरान नारायणन ने कहा कि एईसी 1998 में भी संतुष्ट था और 2009 में भी संतुष्ट है। ऐसे में इस मुद्दे पर चर्चा करना बेमानी है। हाइड्रोजन बम की प्रभाव क्षमता पर के संथानम के बयान से उपजे विवाद के कारण एईसी से 1998 के परमाणु परीक्षणों के आंकड़ों का पुन: अध्ययन करने को कहा गया था। नारायणन ने कहा, मुझे लगता है हम जो चाहते थे, हमने किया। सीएनआर राव, पी रामा राव व एमआर श्रीनिवासन राव जैसे एईसी के आला वैज्ञानिकों व परमाणु कार्यक्रम से जुड़े राजा रमन्ना ने 1998 के परमाणु परीक्षणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नारायणन के मुताबिक थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस में 45 किलोटन ईंधन का इस्तेमाल हुआ था। यह जानकारी किसी को भी नहीं थी। पता नहीं होने के कारण संथानम कुछ भी कह सकते हैं। एईसी के पूर्व प्रमुख पीके आयंगर ने भी परीक्षणों में 45 किलोटन ईंधन के इस्तेमाल की बात स्वीकार की थी और परमाणु विखंडन व संलयन की क्रियाएं एक साथ होने की आशंका जताई थी। जिस परीक्षण में इतने नामी-गिरामी वैज्ञानिक जुड़े थे उसके बारे में संथानम अकेले कोई दावा कैसे कर सकते हैं। मुझे लगता है संवेदनशील मसलों पर सार्वजनिक चर्चा की कोई जरूरत नहीं है। परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी पर तमाम देशों के हस्ताक्षर का आह्वान करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव पर जोर देने के अमेरिकी कदम के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेताओं के समक्ष इस मुद्दे को पहले ही उठाया जा चुका है और उन्होंने भारत को आश्वस्त किया है कि यह असैनिक परमाणु संधि को प्रभावित नहीं करेगी। गैर परमाणु देशों को संवर्धन और पुन: संवर्धन प्रौद्योगिकियों बेचने पर प्रतिबंध पर समूह आठ (जी8) देशों को सहमत करने की अमेरिका की कोशिशों के मद्देनजर भारत ने उन देशों से भी चर्चा की है जिनके साथ उसकी परमाणु संधियां हैं। परमाणु हथियारों के पहले उपयोग नहीं करने के सिद्धांत पर पुनर्विचार का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह केवल एक परमाणु रोधी क्षमता है। हम इसके प्रति कृतसंकल्प हैं। मुशर्रफ का बयान पुराना नारायणन ने कहा है कि आतंकवाद से लड़ने के लिए अमेरिका से मिली मदद का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करने की पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति की स्वीकारोक्ति एक पुरानी कहानी है। पिछले तीन-चार साल के दौरान अमेरिका से आधुनिक हथियारों की पाकिस्तान की खरीदारी हारपून मिसाइल में किसी संशोधन से ज्यादा चिंता का विषय है। उन्होंने परमाणु हथियारों के जखीरे में पाकिस्तान के इजाफा करने की रिपोर्टों पर कहा यह तथ्य निश्चित रूप से चिंता का मुद्दा है कि एक देश अपने परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है जो हमारे प्रति दोस्ती का रूख नहीं रखता।
साभार दैनिक जागरण दिल्ली

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