Saturday, September 12, 2009

एक जहाज डूबा अब किसकी बारी

अनुराग उपाध्याय
कहते हैं जब जहाज डूबने वाला होता हैं तो सबसे पहले चूहे उछल कूद करते हैं और गाहे बगाहे जहाज से कूद जाते हैं मध्यप्रदेश में बड़े-बड़े दावे कर अवतरित हुए वॉइस ऑफ़ इंडिया चैनल के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ जब पिछले बरस २००८ में यह चैनल लाँच हुआ तो इसके कर्ताधर्ताओं ने बड़ी-बड़ी बाते की हालाँकि यह बड़ बोले इस चैनल में शराबखोरी , औरतखोरी और अडीबाजी से ज्यादा कुछ नहीं कर सके ऐसे में नतीजा यह हुआ कि पहले छह महीने में छोड़ पत्रकारिता सब कुछ करने वाले यह लोग वॉइस ऑफ़ इंडिया रूपी जहाज को हिचकोला खाते देख इधर-उधर कूदना शुरू हो गए जो लोग लंगर कि तरह इसे थामे हुए थे वे असल पत्रकार थे और डूबते जहाज के अंतिम वक़्त तक साक्षी बने रहे मध्यप्रदेश में वॉइस ऑफ़ इंडिया न्यूज़ चैनल के डूबने से कुछ मीडियाकर्मियों को समस्याए आना लाजिमी हैं लेकिन धैर्य से वह विषम परिस्थितियों से उबर पाएंगे ऐसी कामना भी हमें करना चाहिए टेलीविज़न चैनल्स पर जिस समय ९/९/९ के संयोग कि खबर चल रही थी उसी वक़्त भोपाल के एम्.पी.नगर में वॉइस ऑफ़ इंडिया चैनल के दफ्तर पर ताला लटकाया जा रहा था इस चैनल के इसी दफ्तर में लड़कियों के साथ यहाँ के प्रमुख ने जिस तरह का बर्ताव किया था उससे तब ही जाहिर हो गया था कि चैनल पर शनि की वक्री द्रष्टि पड़ चुकी हैं और देर सवेर यह चैनल बंद जरुर होगा वी.ओ.आई के बंद होने से ठीक दो हफ्ते पहले मध्यप्रदेश के लोकप्रिय रीजनल चैनल सहारा समय ने अपने यहाँ से जिस तरह रिपोर्टस और कैमरामैन को चलता किया उसके बाद यह तय हो गया हैं कि मध्यप्रदेश का बाजार दो से ज्यादा रीजनल चैनल्स को झेलने कि क्षमता नहीं रखता हैं वॉइस ऑफ़ इंडिया दूसरा रीजनल चैनल हैं इससे पहले वॉच न्यूज़ चैनल भी इसी तरह बंद हुआ इन दोनों चैनल कि टीम बहुत अच्छी थी लेकिन इनके टीम लीडर ऐसे नहीं थे जो चैनल चला सके ऐसे में सवाल उठता हैं कि वॉच न्यूज़ और वॉइस ऑफ़ इंडिया के बाद अब कौन? मध्यप्रदेश में इस वक़्त सहारा समय चैनल दर्शकों कि पहली पसंद हैं और दूसरे नंबर पर ईटीवी हैं एक अन्य साधना न्यूज़ चैनल भी अपने अस्तित्व कि तलाश में संघर्ष कर रहा हैं, लेकिन इसके शीर्ष पर अब वे ही लोग सवार हैं जो "वॉइस ऑफ़ इंडिया" के डूबने का कारन बने हैं इसलिए इस चैनल को लेकर भी संभावनाए कम और आशंकाए ज्यादा नजर आती हैं मध्यप्रदेश में २१ फीसदी दर्शकों के साथ सहारा समय लोगों की पहली पसंद बना हैं तो ईटीवी के पास फिक्स १७ फीसदी दर्शक हैं तीसरे नंबर पर साधना न्यूज़ उसी हाल में हैं जिस हाल में कभी वॉइस ऑफ़ इंडिया हुआ करता था मध्यप्रदेश में रीजनल चैनल देखने वाले अधिकांश लोग सहारा समय पर ही भरोसा करते हैं और वह उनकी पहली पसंद हैं इस बीच ईटीवी ने अपनी ख़बरों के फारमेट में कई तब्दिलिया की और वह नंबर दो का हक़दार बन गया इन दो चैनल्स के बाद सब कुछ भगवन भरोसे हैं ऐसे में जी न्यूज़ मध्यप्रदेश में अपना रीजनल न्यूज़ चैनल लाने जा रहा हैं उसका जी छत्तीसगढ़ प्रयोग सफल रहा हैं और वह दमख़म के साथ मध्यप्रदेश पर कब्जा करना चाहता हैं, जाहिर हैं जी का शटर अप हुआ तो किसी एक चैनल का शटर डाउन हो जायगा वैसा भी दौड़ का नियम यही हैं कि पहले सबसे पीछे दौड़ रहे धावक को पीछे छोडो और आगे बढो मध्यप्रदेश में भी मसला अब "पीछे छोडो और आगे बढों" का हैं सहारा और वीओआई से बेरोजगार हुए इन बेहतरीन रिपोर्टस की शानदार टीम भी इस जुमले पर अमल करेगी और कुछ नया करने में जुट जायेगी क्योंकि मध्यप्रदेश में "कार्यशील और चरित्रवान" पत्रकारों की पूछ परख हमेशा रही हैं वैसे भी जिन लोगों को डूबते जहाज पर सवारी करने का तजुर्बा हो जाए वह अगली बार ऐसा नहीं होने देते, रही बात चूहों कि तो वे फिर उछल कूद में लग गए हैं एक बार फिर डूबते जहाज से बाहर आने के लिए
-लेखक अनुराग उपाध्याय इंडिया टीवी में कार्यरत हैं,
यह लेख http://anuragupadhyay.com/ से साभार लिया है

7 comments:

संजय तिवारी ’संजू’ said...

आपकी लेखन शैली का कायल हूँ. बधाई.

Udan Tashtari said...

आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में हार्दिक स्वागत है. आपके नियमित लेखन के लिए अनेक शुभकामनाऐं.

नारदमुनि said...

bahut bura huya.narayan narayan

हितेंद्र कुमार गुप्ता said...

Bahut Barhia...aapka swagat hai... isi tarah likhte rahiye...

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prabuddhashoots said...

चलिए वॉचडॉग को वॉचडॉग मिला, ये तो अच्छा ही है। उम्मीद है इसी तरह के संतुलित लेख लिखते रहेंगे।

ARTISAN said...

आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

क्रिएटिव मंच said...

अच्छा लेख
आपका स्वागत है
ढेर सारी शुभकामनायें



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