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Thursday, August 27, 2009
मीडिया हाउस हुआ eye4media
Saturday, August 22, 2009
राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार समारोह आज से भोपाल में

कार्यक्रम का उदघाटन आज १२ बजे भारत भवन में संस्कृति एवमं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा करेंगे। समारोह के पहले दिन दो सत्र आयोजित किए जायेंगे। जिसमे से पहले सत्र में विश्व सभ्यताओं के अन्तसंबंध विषय पर चर्चा होगी। दूसरे सत्र में वैश्विक आतंकवाद की चुनोतियों: भारत की भूमिका पर विमर्श एवमं उधबोधन होगा। मुख्य कार्यक्रम रविवार को होगा। जिसमे दैनिक भास्कर समूह के संपादक श्रवण गर्ग, टी वी कलाकार स्मृति ईरानी, तरुण विजय, पीपुल्स समाचार के महेश श्रीवास्तव, राज्यसभा सदस्य प्रभात झा, प्रभु जोशी वक्तव्य देंगे। कार्यक्रम में चर्चा समन्वयक होंगे पत्रकार शरद जोशी। जबिक इसके पहले एक सत्र आयोजित होगा जिसमे स्वाधीन भारत राष्ट्र का बौद्धिक अतीत और भविष्य विषय पर चर्चा होगी।
Friday, August 21, 2009
पत्रकार मगर थे खौफज़दा!

सभी के चेहरे उतरे हुए थे। 18 से लेकर 55 साल तक के लोग इस भीड़ में शामिल थे। लेकिन किसी के भी चेहरे पर मुस्कान नही ।
ऐसा लग रहा था की मानो ये लोग किसी के अन्तिम संस्कार के बाद होने वाले उठावने में शामिल होने आए हों। जबकि वहां कोई न तो कोई अर्थी थी और न ऐसी स्थिति (भगवान न करे) ।
इसके बाद भी पुरा माहोल गम से भरा था। ये कहानी किसी आम आदमी की नही बल्कि है सहारा समय न्यूज़ चेनल के विभिन्न जिलों से आए स्ट्रिंगरों की। जो भोपाल आए थे इस डर के साथ की पता नही की किस स्ट्रिंगर को उसके जिले से अलग कर दिया जाएगा। खेर ऐसा नही हुआ, लेकिन गम तो फ़िर भी था, क्योंकि कई लोग अपने ब्यूरो चीफ से दूर हो चुके थे। दरअसल सहारा समय ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगड़ के भोपाल और रायपुर के ब्यूरो को छोड़कर इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के ब्यूरो समाप्त कर दिए हैं। हालाँकि इस बारे में स्ट्रिंगरों को शाम तक नही बताया गया। मीटिंग के दौरान देखने में आया की सभी स्ट्रिंगर अपने-अपने जिलों में धक्दर हैं लेकिन गुरुवार को इनके चेहरे खौफज़दा थे। मीडिया हाउस गुरुवार को हुई इस बैठक को सिलसिलेवार आपके सामने ला रहा है
11 बजे सुबह- सभी जिलों के पत्रकार सहारा इंडिया कुञ्ज पहुँच गए और मीटिंग का इंतजार करने लगे। हर चेहरे पर एक ही सवाल था की क्या होने वाला है।
12 बजे दोपहर- एक घंटे के इंतजार के बाद सभी स्ट्रिंगर से बोला गया की वे खाना खा लें। इसके बाद अपने ब्यूरो को सर आंखों पर बिठाने वाले स्ट्रिंगरों को एक व्यक्ति भोपाल की मिलन रेस्टोरेंट में ले गया।
फिक्स है मीनू- जिस होटल में स्ट्रिंगरों को खाना खिलाया वहां मीनू में पहले से दो रोटी फिक्स थी। इस कारण कई लोगों का होटल वालों से विवाद भी हुआ।
१.३० बजे दोपहर-मीटिंग शुरू हुई, जिसको इनपुट हेड राजेश झा, भोपाल ब्यूरो प्रकाश तिवारी और रायपुर ब्यूरो रुचिर गर्ग ने संबोधित किया।
अफवाहों पर विश्वास न करें-तीनों ही दिग्गजों ने स्ट्रिंगरों को भरोसा दिलाया की सहारा से किसी भी स्ट्रिंगर को नही निकला जा रहा है और ये केवल अफवाह मात्र है। साथ ही सभी स्ट्रिंगरों को उनका मार्च तक पेमेंट भी कर दिया गया। इसके पीछे भी एक खास वजह थी की बहुत जल्द मध्य प्रदेश में जन सन्देश और जी का क्षेत्रीय चेनल शुरू हो रहे हैं और सहारा मुश्किल वक़्त में अपने होनहार स्ट्रिंगरों को खोना नही चाहता।
ब्यूरो क्यों ख़त्म किए, इस बात का नही था कोई जवाब-हमेशा मीटिंग में नज़र आने वाले इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर ब्यूरो नज़र नही आए तो स्ट्रिंगर्स ने सवाल किया लेकिन इनपुट हेड के साथ सभी ने इस सवाल का जवाब टाल दिया। बाद में मालूम करने पर पता चला की भोपाल ब्यूरो को छोड़ शेष सभी ब्यूरो और पत्रकारों को स्ट्रिंगर बना दिया। इस बात से सभी स्ट्रिंगर बेहद दुखी दिखाई दिए।
ब्राम्हण पत्रकारों के भोज का सच

(साभार दखल नेट)
मध्य प्रदेश में पत्रकारों का बड़ा फेरबदल
विनोद त्रिपाठी को ग्वालियर भास्कर में भिंड का ब्यूरों बना दिया। भिंड के ब्यूरो रहे लाजपत अग्रवाल ने भास्कर छोड़ दिया है। नितिन दुबे ने पीपुल्स समाचार ज्वाइन कर लिया है। प्रदुम्न प्रकाश ने नवभारत छोड़कर डी बी स्टार ज्वाइन कर लिया है। अनिल शर्मा ग्वालियर भास्कर के स्थानीय संपादक बन गए हैं। अनूप शाह को दैनिक भास्कर का स्थानीय संपादक बनाया गया है। बलराम सोनी को ग्वालियर भास्कर से स्थानांतरित कर भोपाल भास्कर लाया गया है। मुकेश सक्सेना को भोपाल भास्कर से वापस ग्वालियर भेज दिया है। इंदौर भास्कर से शैलेष दिक्षित, कपिल भटनागर, विनोद शर्मा ने भास्कर से इस्तीफा देकर पत्रिका ज्वाइन कर लिया है। राजीव भदोरिया, राजू चंद्रवंशी, आशीष सक्सेना ने उज्जैन भास्कर छोड़ दिया है। इसके साथ पीपुल्स समाचार ग्वालियर से शुरू होने के साथ ही भास्कर ग्वालियर से 14 पत्रकारों ने भास्कर को छोड़ने का मन बना लिया है। इसके आलावा भोपाल भास्कर और पत्रिका से भी कई पत्रकारों ने संसथान छोड़ने का मन बना लिया है।
Thursday, August 20, 2009
शाहरुख़ तुम वाकई बड़े अभिनेता(नेता) बन गए हो!
ये ख़बर हे
एक दैनिक अख़बार की जिसमे शाहरुख़ खान ने सफाई दी है की उन्हें पब्लिसिटी के लिए कोई स्टंट करने की जरूरत नही है। साथ ही ये भी कहा की किसी भी देश की सुरक्षा व्यवस्था उनके लिए सर्वोपरि है। अब सवाल ये है की आख़िर चार दिन में शाहरुख़ खान उर्फ़ किंग खान के हृदय परिवर्तन केसे हो गया? क्योंकि यही वे शाहरुख़ हैं जो 15 अगस्त को बकायदा सभी चेनल पर कह रहे थे की उन्हें केवल मुस्लिम होने के कारण इस चेकिंग से गुजरना पड़ रहा है। चूँकि अब उनका काम हो चुका है और पूरे देश की जनता जान गई है की उनकी माय नेम इस खान नाम से कोई फ़िल्म बन रही है। अब नैतिकता दिखने में कोई हर्ज़ नही है। उल्टा अब गलतबयानी करने से दोबारा फ़िल्म को प्रचार मिलेगा। क्योंकि ख़बरों की भूखी( केवल चमक वाली ख़बरों की) मीडिया को बताना तो पड़ेगा की आख़िर शाहरुख़ किस बात का खंडन कर रहे हैं । ऊपर से सलमान को भी सीख दे डाली की वे मामूली हैं और शाहरुख़ गैर मामूली हैं इसलिए उनके ऊपर कमेन्ट नही करना चाहिए।
पत्रकारिता विश्वविद्यालय में मना ब्लॉग का दसवा जन्मदिन
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