Friday, August 21, 2009

पत्रकार मगर थे खौफज़दा!

भोपाल। गुरुवार यानि 20/08/2009 को भोपाल स्थित सहारा इंडिया कुञ्ज के सामने 100 लोगों की भीड़।
सभी के चेहरे उतरे हुए थे। 18 से लेकर 55 साल तक के लोग इस भीड़ में शामिल थे। लेकिन किसी के भी चेहरे पर मुस्कान नही ।
ऐसा लग रहा था की मानो ये लोग किसी के अन्तिम संस्कार के बाद होने वाले उठावने में शामिल होने आए हों। जबकि वहां कोई न तो कोई अर्थी थी और न ऐसी स्थिति (भगवान न करे) ।
इसके बाद भी पुरा माहोल गम से भरा था। ये कहानी किसी आम आदमी की नही बल्कि है सहारा समय न्यूज़ चेनल के विभिन्न जिलों से आए स्ट्रिंगरों की। जो भोपाल आए थे इस डर के साथ की पता नही की किस स्ट्रिंगर को उसके जिले से अलग कर दिया जाएगा। खेर ऐसा नही हुआ, लेकिन गम तो फ़िर भी था, क्योंकि कई लोग अपने ब्यूरो चीफ से दूर हो चुके थे। दरअसल सहारा समय ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगड़ के भोपाल और रायपुर के ब्यूरो को छोड़कर इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के ब्यूरो समाप्त कर दिए हैं। हालाँकि इस बारे में स्ट्रिंगरों को शाम तक नही बताया गया। मीटिंग के दौरान देखने में आया की सभी स्ट्रिंगर अपने-अपने जिलों में धक्दर हैं लेकिन गुरुवार को इनके चेहरे खौफज़दा थे। मीडिया हाउस गुरुवार को हुई इस बैठक को सिलसिलेवार आपके सामने ला रहा है
11 बजे सुबह- सभी जिलों के पत्रकार सहारा इंडिया कुञ्ज पहुँच गए और मीटिंग का इंतजार करने लगे। हर चेहरे पर एक ही सवाल था की क्या होने वाला है।
12 बजे दोपहर- एक घंटे के इंतजार के बाद सभी स्ट्रिंगर से बोला गया की वे खाना खा लें। इसके बाद अपने ब्यूरो को सर आंखों पर बिठाने वाले स्ट्रिंगरों को एक व्यक्ति भोपाल की मिलन रेस्टोरेंट में ले गया।
फिक्स है मीनू- जिस होटल में स्ट्रिंगरों को खाना खिलाया वहां मीनू में पहले से दो रोटी फिक्स थी। इस कारण कई लोगों का होटल वालों से विवाद भी हुआ।
१.३० बजे दोपहर-मीटिंग शुरू हुई, जिसको इनपुट हेड राजेश झा, भोपाल ब्यूरो प्रकाश तिवारी और रायपुर ब्यूरो रुचिर गर्ग ने संबोधित किया।
अफवाहों पर विश्वास न करें-तीनों ही दिग्गजों ने स्ट्रिंगरों को भरोसा दिलाया की सहारा से किसी भी स्ट्रिंगर को नही निकला जा रहा है और ये केवल अफवाह मात्र है। साथ ही सभी स्ट्रिंगरों को उनका मार्च तक पेमेंट भी कर दिया गया। इसके पीछे भी एक खास वजह थी की बहुत जल्द मध्य प्रदेश में जन सन्देश और जी का क्षेत्रीय चेनल शुरू हो रहे हैं और सहारा मुश्किल वक़्त में अपने होनहार स्ट्रिंगरों को खोना नही चाहता।
ब्यूरो क्यों ख़त्म किए, इस बात का नही था कोई जवाब-हमेशा मीटिंग में नज़र आने वाले इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर ब्यूरो नज़र नही आए तो स्ट्रिंगर्स ने सवाल किया लेकिन इनपुट हेड के साथ सभी ने इस सवाल का जवाब टाल दिया। बाद में मालूम करने पर पता चला की भोपाल ब्यूरो को छोड़ शेष सभी ब्यूरो और पत्रकारों को स्ट्रिंगर बना दिया। इस बात से सभी स्ट्रिंगर बेहद दुखी दिखाई दिए।

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