Monday, December 22, 2008

क्या मजबूरी है की अनपढ़ मंत्री बनाया जाए?

फ़िर शुद्धः अनपढ़ मंत्री क्या गलती हो गई?
वेसे तो ये आलेख पहले लिखा था लेकिन उस समय मेरा मकसद केवल मंत्री मंडल की जानकारी देना भर था लेकिन मुझे लगा की कुछ एसा है जो छूट गया लेकिन क्या? आखिरकार दिल को चेन नहीं मिला और फ़िर से लिखना शुरू कर दिया। क्योंकि इस मंत्रिमंडल में एक अनपढ़ मंत्री गोलमा देवी भी शामिल है। अब समझ नहीं आ रहा है की हमसे गलती हो गई हैं या फ़िर hअमर सामने पद भरने की मजबूरी थी
मुझे लगता है की राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्रियों को बनाया तो है लेकिन उनके सामने शिवराज की तरह भारी दबाव नहीं था और वो इसलिए क्योंकि उन्हें राजस्थान के सबसे ताकतवर नेता किरोड़ीमल का समर्थन हासिल था और इसी के फलस्वरूप मुख्यमंत्री गहलोत ने गोलमा देवी जो की पूरी तरह निरक्षर है को राज्यमंत्री बनाया और इसका किसी ने विरोध नहीं किया। लेकिन यहाँ सवाल दूसरा है।
अनपढ़ हुए तो क्या हुआ ?
गोलमा देवी ने मंत्री पद की शपथ ली तो मीडिया ने उनसे सवाल किया की आप अनपढ़ है केसे मंत्री पद का निर्वहन करेंगी तो उन्होंने कहा की जब राबड़ी देवी सीएम बन सकती हैं तो वह मंत्री क्यों नहीं ban sakti और उनका तर्क कोई गलत भी नहीं है। क्योंकि इस देश का ये दुर्भाग्य है यहाँ पड़े लिखे मंत्री बन्ने की भागम भाग में पिछड़ जाते है और ओपचारिकता पूरी नहीं कर पाते हैं।
अनपढ़ आवश्यकता या मजबूरी?
अब सवाल ये है की अनपढ़ हमारी आवश्यकता है या मजबूरी है। यानी समाज में जिसे दुनिया daari की समझ है और जनता का दुःख दर्द समझ आता है वो नेता बेहतर है या जिसे दुनिया समझ में आती है और जो प्रदेश को हर क्षेत्र में आगे बड़ा सके जिसे समझ में आता है की जनता के लिए vidhvans भी लाभकारी हो सकता है वो नेता है बेहतर है। विचार हमें और आपको करना है। अगर हम अच्छे नेता नहीं बना सकते या फ़िर नहीं बन सकते है तो मुझे लगता है इस विषय पर चर्चा नहीं करना चाहिए। न ही देश में हुई किसी बड़ी घटना के लिए एकदम से वर्तमान राजनीति को गली दे देना चाहिए।
अब एक जानकारी राजस्थान की
सीएम के पास रहेंगे ये विभाग-
ये विभागवित्त एवं कर, गृह, एसीबी, जेल, नागरिक सुरक्षा, नगरीय विकास एवं आवासन, स्वायत्त शासन, आयोजना, कार्मिक, सार्वजनिक निर्माण, प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय, मंत्रिमण्डल सचिवालय, ऊर्जा व गैर परम्परागत स्रोत ऊर्जा, नागरिक उड्डयन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, चुनाव, सूचना एवं जनसम्पर्क, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, वक्फ, खान, आपदा राहत, सम्पदा, आबकारी, वन एवं पर्यावरण, आर्थिक एवं सांख्यिकी, तकनीकी शिक्षा (कृषि), खादी एवं ग्रामोद्योग, डेयरी, युवा एवं खेल मामलात, मोटर गैराज, कृषि विपणन, देवस्थान, नीति निर्माण, जनशक्ति आयोजना, राज्य बीमाशिक्षा देखेंगे सीएम सहित छह मंत्रीप्रदेश में शिक्षा का काम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित छह मंत्रियों के जिम्मे रहेगा।
विभाग किसे क्या मिला
(केबिनेट)
१.मास्टर भंवरलाल-श्रम-रोजगार प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा
२.बीना काक-पर्यटन कला,संस्कृति महिला व बाल विकास मुद्रण-लेखन
३.महेन्द्रजीत मालवीया—जनजाति विकास अभाव अभियोग निवारण
४.महिपाल मदेरणा— जल संसाधन आईजीएनपी पीएचईडी,भू-जल व सीएडी
५.परसादी लाल मीणा—सहकारिता, अल्प बचत एवं लॉटरी
६.शांति धारीवाल— उद्योग, विधि, संसदीय कार्य, उच्च शिक्षा (अति.प्रभार)
७.बृजकिशोर शर्मा—परिवहन संस्कृत शिक्षा भाषा एवं भाषायी अल्पसंख्यक
८.एमाद्दुदीन खान उर्फ दुर्रू मियां—स्वास्थ्य परिवार कल्याण स्वास्थ्य शिक्षा
९.हरजीराम बुरडक— कृषि पशुपालन मत्स्य पालन
१०.हेमाराम चौधरी—राजस्व उपनिवेशन सैनिक कल्याण
११.भरत सिंह— ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज
राज्यमंत्री
१२.रामकिशोर सैनी—सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
१३.गोलमा देवी मीणा —खादी एवं ग्रामोद्योग

2 comments:

राज said...

bahut badhiya, aapne rajasthan ke mantrimandal ki jaankari di.

Bahadur Patel said...

achchhi jankari di aapane. nirakshar aur sakshar hone fark nahin padhata hai.samjh jyada jaroori hai.

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