मध्य प्रदेश के एक प्रसिद्द चेनल के प्रमुख जो दिल्ली में बैठते हैं १३ मई को प्रदेश के सिहोर जिले के एक होटल में लड़की के साथ पुलिस के हत्थे चढ़ गये। इनके साथ जो लड़की थी वह भी दिल्ली से आई थी। इनको पुलिस से बचाने में एक स्थानीय पत्रकार ने अहम् भूमिका निभाई। आपको याद दिला दें की ये वाही पत्रकार हैं जो पहले एक तलाकशुदा लड़की को पत्रकार बनाने के नाम पर उसका शारीरिक शोषण कर चुके हैं और काफी चर्चा में भी रहे थे। खेर अपन आते हैं मुद्दे की बात पर की दिल्ली के बड़े पत्रकार सिहोर के बड़े होटल में क्या कर रहे थे? बताया जाता है की ये एक मीटिंग के नाम पर भोपाल आए थे लेकिन भोपाल के बजाय ये सिहोर में रुक गए और अपने साथ लाये एक सुंदर सी लड़की के साथ सुखद पल बिताये। दिक्कत तब हो गई जब किसी ने इनके सुखद पलों से जलभुनकर पुलिस को सुचना कर दी। पुलिस ने भी बिना देर किए पत्रकार महोदय को होटल में धर दबोचा, लेकिन इसी दरम्यान भोपाल में बेठे नामी पत्रकार को इसकी जानकारी मिल गई तो अपने आका को बचाने के लिए तत्काल वहां पहुंचे और मामले को रफा दफा काज दिया। सवाल ये है की दिल्ली वाले पत्रकार के नाम की नए- नवेले पत्रकार दुहाई देते हैं लेकिन इस प्रकार की हरकत होंगी तो कुछ ऐसीही परिपाटी बन जायेगी। गोरतलब है की १३ मई को न्यूज़ चेनल से एग्जिट पोल दिखाने से रोक हटी थी और तमाम बड़े चेनल और पत्रकार देश की तस्वीर पेश कर रहे थे और वे मौज कर रहे थे।
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Saturday, May 16, 2009
बड़े पत्रकार लड़की के साथ ?
मध्य प्रदेश के एक प्रसिद्द चेनल के प्रमुख जो दिल्ली में बैठते हैं १३ मई को प्रदेश के सिहोर जिले के एक होटल में लड़की के साथ पुलिस के हत्थे चढ़ गये। इनके साथ जो लड़की थी वह भी दिल्ली से आई थी। इनको पुलिस से बचाने में एक स्थानीय पत्रकार ने अहम् भूमिका निभाई। आपको याद दिला दें की ये वाही पत्रकार हैं जो पहले एक तलाकशुदा लड़की को पत्रकार बनाने के नाम पर उसका शारीरिक शोषण कर चुके हैं और काफी चर्चा में भी रहे थे। खेर अपन आते हैं मुद्दे की बात पर की दिल्ली के बड़े पत्रकार सिहोर के बड़े होटल में क्या कर रहे थे? बताया जाता है की ये एक मीटिंग के नाम पर भोपाल आए थे लेकिन भोपाल के बजाय ये सिहोर में रुक गए और अपने साथ लाये एक सुंदर सी लड़की के साथ सुखद पल बिताये। दिक्कत तब हो गई जब किसी ने इनके सुखद पलों से जलभुनकर पुलिस को सुचना कर दी। पुलिस ने भी बिना देर किए पत्रकार महोदय को होटल में धर दबोचा, लेकिन इसी दरम्यान भोपाल में बेठे नामी पत्रकार को इसकी जानकारी मिल गई तो अपने आका को बचाने के लिए तत्काल वहां पहुंचे और मामले को रफा दफा काज दिया। सवाल ये है की दिल्ली वाले पत्रकार के नाम की नए- नवेले पत्रकार दुहाई देते हैं लेकिन इस प्रकार की हरकत होंगी तो कुछ ऐसीही परिपाटी बन जायेगी। गोरतलब है की १३ मई को न्यूज़ चेनल से एग्जिट पोल दिखाने से रोक हटी थी और तमाम बड़े चेनल और पत्रकार देश की तस्वीर पेश कर रहे थे और वे मौज कर रहे थे।
Monday, December 22, 2008
क्या मजबूरी है की अनपढ़ मंत्री बनाया जाए?
फ़िर शुद्धः अनपढ़ मंत्री क्या गलती हो गई?वेसे तो ये आलेख पहले लिखा था लेकिन उस समय मेरा मकसद केवल मंत्री मंडल की जानकारी देना भर था लेकिन मुझे लगा की कुछ एसा है जो छूट गया लेकिन क्या? आखिरकार दिल को चेन नहीं मिला और फ़िर से लिखना शुरू कर दिया। क्योंकि इस मंत्रिमंडल में एक अनपढ़ मंत्री गोलमा देवी भी शामिल है। अब समझ नहीं आ रहा है की हमसे गलती हो गई हैं या फ़िर hअमर सामने पद भरने की मजबूरी थी
मुझे लगता है की राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्रियों को बनाया तो है लेकिन उनके सामने शिवराज की तरह भारी दबाव नहीं था और वो इसलिए क्योंकि उन्हें राजस्थान के सबसे ताकतवर नेता किरोड़ीमल का समर्थन हासिल था और इसी के फलस्वरूप मुख्यमंत्री गहलोत ने गोलमा देवी जो की पूरी तरह निरक्षर है को राज्यमंत्री बनाया और इसका किसी ने विरोध नहीं किया। लेकिन यहाँ सवाल दूसरा है।
अनपढ़ हुए तो क्या हुआ ?
गोलमा देवी ने मंत्री पद की शपथ ली तो मीडिया ने उनसे सवाल किया की आप अनपढ़ है केसे मंत्री पद का निर्वहन करेंगी तो उन्होंने कहा की जब राबड़ी देवी सीएम बन सकती हैं तो वह मंत्री क्यों नहीं ban sakti और उनका तर्क कोई गलत भी नहीं है। क्योंकि इस देश का ये दुर्भाग्य है यहाँ पड़े लिखे मंत्री बन्ने की भागम भाग में पिछड़ जाते है और ओपचारिकता पूरी नहीं कर पाते हैं।
अनपढ़ आवश्यकता या मजबूरी?
अब सवाल ये है की अनपढ़ हमारी आवश्यकता है या मजबूरी है। यानी समाज में जिसे दुनिया daari की समझ है और जनता का दुःख दर्द समझ आता है वो नेता बेहतर है या जिसे दुनिया समझ में आती है और जो प्रदेश को हर क्षेत्र में आगे बड़ा सके जिसे समझ में आता है की जनता के लिए vidhvans भी लाभकारी हो सकता है वो नेता है बेहतर है। विचार हमें और आपको करना है। अगर हम अच्छे नेता नहीं बना सकते या फ़िर नहीं बन सकते है तो मुझे लगता है इस विषय पर चर्चा नहीं करना चाहिए। न ही देश में हुई किसी बड़ी घटना के लिए एकदम से वर्तमान राजनीति को गली दे देना चाहिए।
अब एक जानकारी राजस्थान की
सीएम के पास रहेंगे ये विभाग-
ये विभागवित्त एवं कर, गृह, एसीबी, जेल, नागरिक सुरक्षा, नगरीय विकास एवं आवासन, स्वायत्त शासन, आयोजना, कार्मिक, सार्वजनिक निर्माण, प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय, मंत्रिमण्डल सचिवालय, ऊर्जा व गैर परम्परागत स्रोत ऊर्जा, नागरिक उड्डयन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, चुनाव, सूचना एवं जनसम्पर्क, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, वक्फ, खान, आपदा राहत, सम्पदा, आबकारी, वन एवं पर्यावरण, आर्थिक एवं सांख्यिकी, तकनीकी शिक्षा (कृषि), खादी एवं ग्रामोद्योग, डेयरी, युवा एवं खेल मामलात, मोटर गैराज, कृषि विपणन, देवस्थान, नीति निर्माण, जनशक्ति आयोजना, राज्य बीमाशिक्षा देखेंगे सीएम सहित छह मंत्रीप्रदेश में शिक्षा का काम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित छह मंत्रियों के जिम्मे रहेगा।
विभाग किसे क्या मिला
(केबिनेट)
१.मास्टर भंवरलाल-श्रम-रोजगार प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा
२.बीना काक-पर्यटन कला,संस्कृति महिला व बाल विकास मुद्रण-लेखन
३.महेन्द्रजीत मालवीया—जनजाति विकास अभाव अभियोग निवारण
४.महिपाल मदेरणा— जल संसाधन आईजीएनपी पीएचईडी,भू-जल व सीएडी
५.परसादी लाल मीणा—सहकारिता, अल्प बचत एवं लॉटरी
६.शांति धारीवाल— उद्योग, विधि, संसदीय कार्य, उच्च शिक्षा (अति.प्रभार)
७.बृजकिशोर शर्मा—परिवहन संस्कृत शिक्षा भाषा एवं भाषायी अल्पसंख्यक
८.एमाद्दुदीन खान उर्फ दुर्रू मियां—स्वास्थ्य परिवार कल्याण स्वास्थ्य शिक्षा
९.हरजीराम बुरडक— कृषि पशुपालन मत्स्य पालन
१०.हेमाराम चौधरी—राजस्व उपनिवेशन सैनिक कल्याण
११.भरत सिंह— ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज
राज्यमंत्री
१२.रामकिशोर सैनी—सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
१३.गोलमा देवी मीणा —खादी एवं ग्रामोद्योग
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